लोकपाल से बचने को आया एफडीआई
जागरण संवाददाता, मुंबई समाजसेवी अन्ना हजारे ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में सशक्त लोकपाल को पारित करवाने से बचने के लिए खुदरा क्षेत्र में सीधे विदेशी निवेश के मसले को लगातार लटका रही है। शुक्रवार को अपने गांव रालेगण सिद्धि में राहुल पर सीधे हमला करते हुए हजारे ने कहा कि स्थायी समिति ने कांग्रेस महासचिव के इशारे पर ग्रुप-सी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने का निर्णय लिया है। उन्होंने स्थायी समिति पर संसद द्वारा किए गए वायदे से मुकरने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा कि इस सरकार में कोई तालमेल ही नहीं है। अन्ना ने कहा कि लोकपाल पर काम कर रही स्थायी समिति ने पहले निचली श्रेणी के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में शामिल करने का निर्णय किया। मुझे लगता है, इस निर्णय के बाद राहुल गांधी ने समिति के सदस्यों को फोन कर कहा होगा कि ना, ना, ना ऐसा मत करो। इसके बाद समिति ने वही किया, जैसा वह चाहते थे। यह पूछे जाने पर कि वह सीधे राहुल गांधी पर यह आरोप कैसे लगा सकते हैं? अन्ना ने कहा कि ये मेरा अनुमान है। हालांकि, बिना आग के धुआं नहीं उठता और यह जरूरी नहीं है कि आग दिखाई ही पड़े। अन्ना का यह बयान स्थायी समिति के उस निर्णय के बाद आया है, जिसमें समिति ने ग्रुप सी और डी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने व सीबीआइ निदेशक की तीन सदस्यीय चयन समिति में लोकपाल को शामिल नहीं किए जाने की बात कही है । अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह खुदरा क्षेत्र में सीधे निवेश के मुद्दे को जानबूझकर लटका रही है, ताकि शीतकालीन सत्र में लोकपाल विधेयक पास न हो सके। अगर ऐसा होता है, तो यह पूरे देश के साथ विश्वासघात होगा। संसद ने एक मत से और बाद में खुद प्रधानमंत्री ने शीतकालीन सत्र में एक सशक्त लोकपाल विधेयक पारित करवाने का आश्वासन दिया था। प्रधानमंत्री की नीयत पर शंका जताते हुए अन्ना ने कहा कि एक तरफ तो वह कहते हैं कि भ्रष्टाचार खत्म होना चाहिए। दूसरी ओर, वह ग्रुप सी व डी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे से बाहर भी रखना चाहते हैं। राहुल गांधी द्वारा लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने की मांग पर अन्ना ने कहा कि वह खुद भी लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने के विरोध में नहीं है, लेकिन इसमें सरकारी हस्तक्षेप नहीं चाहते।
(दैनिक जागरण ३ दिसंबर )
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